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रमज़ान महीने की 5 खास बातें

रमज़ान महीने की 5 खास बातें

 

रमज़ान महीने की 5 खास बातें

 

रमजान केसा महिना हैं की हमारे Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam इरसाद फरमाते हैं की मेरी उम्मत को माहे रमज़ान मे पाँच एसी चिजे अता की गई हैं जो मुजसे पहेले की किसी नबी अलयह सलाम को नहीं मिली।

यह पाँच स्पेसयल चिजे हे या 5 खास चिजे हैं जो इससे पहेले की किसी उम्मत को नहीं मिली।

रमज़ान महीने की पहेली खास बात  

 तो आइए हम जानते हैं जो हमे मिलने वाली हैं जब रमज़ान मुबारक की पहेली रात आती हैं, तो अल्लाह अज्वज्ल उनकी तरफ यानि मुसलमानो की तरफ नजरे रहमत फरमाता हैं। और जिसकी तरफ अल्लाह अज्वज्ल नजरे रहमत फरमाए उसको कभी अज़ाब नहीं देगा,

रमज़ान महीने की दूसरी खास बात  

दूसरी बात मेरे और तुम्हारे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam फरमाते हैं साम के उनकी मुह की बू, जो रोजादार पूरे दिन भूखा रहता हैं उनके मुह से बदबू आती हैं, कई लोगो को रोजा रखने के बाद साम के वक्त ये ख्याल आता हैं के ये बदबू मुह से आती हैं लेकिन सुनो मेरे मुसलमान भाइयो हमारे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam इर्साद फरमाते हैं अल्लाह अज्वज्ल के नजदीक रोजेदार के मुह की बदबू मुस्क से भी ज्यादा खुसबूदार हैं।

क्या बात हैं मेरे मुसलमान भाइयो राजेदारों की.......

रमज़ान महीने की तीसरी खास बात  

तीसरी बात फरिस्ते रात और दिन उनके लिए दुआए मगफिरत करते रहते हैं। ए खुसकिसमत रोजेदार जरा सोचो आज हम किसी नेक सख्स को देखे, किसी आलिमे दीन को देखे, किसी बुजुर्ग को देखे तो तमन्ना होती हैं के ये मेरे लिए दुआ करदे बड़ी अच्छी बात हैं ये दुआए करवानी चाहिए लेकी रोजेदारो को की तो बात देखे के रोजेदार रोजा रखे, सुभह से लेकर साम तक और साम से लेकर सुभह तक फरिस्ते उनके लिए मगफिरत की दुवाए करते हैं।

रमज़ान महीने की चौथी खास बात  

चोथी फाजिलत मेरे और तुम्हारे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam इर्साद फरमाते हैं के अल्लाह अज्वज्ल जन्नत को हुकुम फरमाता हैं मेरे नेक बंदो के लिए आरस्ता हो जा अनकरीब वो दुनिया की मुसक्कत से मेरे घर और करम मे राहत पाएगे। इसका मतलब ये हैं के मेरे अल्लाह अज्वज्ल के हुकम से रोजेदारों के लिए जन्नत को सजाया जाता हैं।

रमज़ान महीने की पाँचवी खास बात  

और पाँच माँ करम क्या होता हैं हमारे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam इर्साद फरमाते हैं जब रमजान की आखिरी रात आती हैं, तो अल्लाह अज्वज्ल सब की मगफिरत फरमा देता हैं उसक वक़्त जब हमारे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam ये बात बता रहे थे तब एक सहाबी ने खड़े होकर अर्ज की के या मेरे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam क्या ये लेयलतुल-क़द्र हैं तो मेरे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam ने इरसाद फरमाया के नहीं क्या तुम ये नहीं देखते के मजदूर जब उनके कामो से फ़ारिक हो जाते हैं तो उन्हे उनकी उजरत दे दी जाती हैं, इसलिए मेरे आका Huzoor Nabi e Kareem Sallallaho Alaihay Wasallam ने फरमाया के रमज़ान की आखिरी रात मजदूरी मिलनेकी रात, ईनाम मिलने की रात होती हैं।

इसीलिए मेरे प्यारे मुसलमान भाइयो इस माहे रमज़ान मे हमे चाहिए की हम खूब सारी नेकीया करे और हमारे रब को राजी करे।

इस पोस्ट के लिखने मे अगर कोई भूल या खता हो तो मौजे माफ करना और पोस्ट को पढ़ने के बाद आगे शेर जरूर करना ताकि दूसरे भी इसका लाभ ले सके। 

खुदा हाफिस।

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